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पटना में LPG किल्लत से शादियों का बजट बिगड़ा, थाली महंगी और मेन्यू छोटा
- Reporter 12
- 08 Apr, 2026
पटना में LPG सिलेंडर की किल्लत और बढ़ती लागत ने शादी-विवाह का बजट बिगाड़ दिया है। कैटरिंग, हॉल और खाने-पीने के खर्च में 15 से 20 फीसदी तक इजाफा हुआ है, जिससे प्रति थाली महंगी और मेन्यू छोटा हो गया है।
पटना/आलम की खबर:पटना में इस बार शादी-विवाह का सीजन केवल बैंड-बाजा, सजावट और उत्साह तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसके पीछे बढ़ते खर्च, ईंधन संकट और घरेलू बजट की भारी चिंता भी जुड़ गई है। एलपीजी गैस सिलेंडर की किल्लत और बढ़ती कीमतों ने राजधानी में होने वाली शादियों का पूरा हिसाब-किताब बदल दिया है। कैटरिंग से लेकर हॉल बुकिंग, लाइव काउंटर से लेकर पारंपरिक पकवान तक, हर हिस्से पर महंगाई का दबाव साफ दिखाई देने लगा है। इसका सबसे ज्यादा असर मध्यमवर्गीय परिवारों पर पड़ा है, जो पहले से तय बजट में शादी निपटाने के लिए अब समारोह छोटे कर रहे हैं, मेन्यू सीमित कर रहे हैं और कई अतिरिक्त रस्मों को भी कम या खत्म करने की तैयारी में हैं।
पटना में शादी सीजन की हलचल शुरू होते ही बाजार में रौनक बढ़ जाती है, लेकिन इस बार रौनक के साथ चिंता भी बढ़ी हुई है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव, गैस आपूर्ति पर दबाव और स्थानीय स्तर पर व्यावसायिक सिलेंडरों की सीमित उपलब्धता ने शादी आयोजकों और कैटरिंग कारोबारियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। इसका सीधा असर शादी के खाने-पीने पर पड़ा है। अब पहले जैसी भरपूर और लंबी मेन्यू वाली दावतें हर परिवार के बस की बात नहीं रह गई हैं। थाली के दाम बढ़ गए हैं और प्लेट में परोसे जाने वाले आइटम घट गए हैं।
कैटरिंग का खर्च बढ़ा, हर प्लेट पर पड़ा असर
पटना के कैटरिंग कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि बीते कुछ समय में ईंधन और रसोई संचालन की लागत में तेज बढ़ोतरी हुई है। गैस सिलेंडर की किल्लत के कारण बड़े आयोजनों में खाना तैयार करना पहले की तुलना में कहीं ज्यादा महंगा पड़ रहा है। यही वजह है कि प्रति प्लेट कैटरिंग रेट में 15 से 20 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी देखी जा रही है। जिन आयोजनों में पहले वेज थाली अपेक्षाकृत कम लागत में तैयार हो जाती थी, वहां अब प्रति प्लेट 50 से 100 रुपये तक अतिरिक्त बोझ जुड़ गया है। मांसाहारी मेन्यू वाले आयोजनों में यह दबाव और ज्यादा महसूस किया जा रहा है, क्योंकि गैस के साथ-साथ अन्य खाद्य सामग्री की लागत भी लगातार ऊपर गई है।
शहर के कई कैटरिंग ऑपरेटरों का कहना है कि पहले जिन पैकेजों में तीन से चार तरह की सब्जियां, रायता, सलाद, चटनी, पापड़, पूड़ी, पुलाव और मिठाई के कई विकल्प शामिल रहते थे, अब वही पैकेज सीमित किए जा रहे हैं। परिवारों की पहली कोशिश यही रहती है कि शादी की शान भी बनी रहे और बजट भी पूरी तरह न बिगड़े। लेकिन गैस संकट ने यह संतुलन कठिन बना दिया है।
अब “भव्य मेन्यू” की जगह “व्यवस्थित खर्च” पर जोर
पटना में इस बार शादी आयोजनों में एक बड़ा बदलाव साफ दिख रहा है—अब लोग “ज्यादा आइटम” की जगह “जरूरी आइटम” रखने पर ध्यान दे रहे हैं। पहले जहां मेहमानों के स्वागत में कई लाइव काउंटर, स्नैक्स कॉर्नर और मिठाइयों की लंबी श्रृंखला देखी जाती थी, वहीं अब परिवार लागत कम करने के लिए मेन्यू को छोटा कर रहे हैं। कई आयोजनों में मिठाई के विकल्प कम किए जा रहे हैं, सब्जियों की संख्या घटाई जा रही है और कुछ जगहों पर स्टार्टर सेक्शन भी सीमित किया जा रहा है।
मिडिल क्लास परिवारों के लिए यह स्थिति सबसे कठिन है। एक ओर सामाजिक प्रतिष्ठा और रिश्तेदारी की अपेक्षाएं हैं, दूसरी ओर लगातार बढ़ता खर्च। ऐसे में अब कई घरों ने यह रास्ता चुना है कि भोजन का स्तर बनाए रखा जाए, लेकिन व्यंजनों की संख्या कम कर दी जाए। यानी शादी होगी, मेहमान भी आएंगे, लेकिन अब प्लेट पहले जैसी भारी नहीं होगी।
लाइव काउंटर और स्टॉल पर सबसे पहले चली कैंची
शादी-विवाह में सबसे ज्यादा आकर्षण का केंद्र रहने वाले लाइव फूड काउंटर इस बार सबसे ज्यादा प्रभावित नजर आ रहे हैं। जलेबी, इमरती, डोसा, चाट, चाउमिन, छोला-भटूरा, पाव-भाजी, हलवा और अन्य ताजा व्यंजन परोसने वाले स्टॉल अब हर आयोजन में पहले जैसे नहीं दिख रहे। आयोजकों का कहना है कि इन काउंटरों में लगातार गैस की जरूरत होती है और लागत भी अधिक आती है, इसलिए इन्हें कम करना या हटाना मजबूरी बनता जा रहा है।
कुछ परिवारों ने तो नाश्ते और हल्के जलपान में भी बदलाव कर दिया है। जहां पहले ताजा बने स्नैक्स परोसे जाते थे, वहां अब पैक्ड या रेडीमेड आइटम का इस्तेमाल बढ़ रहा है। इसका मकसद केवल खर्च कम करना नहीं, बल्कि गैस पर निर्भरता घटाना भी है। यह बदलाव इस बात का संकेत है कि शादी जैसे बड़े सामाजिक आयोजन भी अब बाजार और ईंधन संकट से अछूते नहीं रहे।
केवल कैटरिंग नहीं, हॉल और आयोजन पैकेज भी हुए महंगे
गैस संकट का असर केवल खाना बनाने तक सीमित नहीं है। पटना में शादी हॉल, बैंक्वेट और पैकेज आधारित आयोजनों की लागत भी बढ़ी हुई बताई जा रही है। जहां हॉल, सजावट, कैटरिंग और अन्य सुविधाएं एक साथ उपलब्ध कराई जाती हैं, वहां प्रति प्लेट दर में और ज्यादा बढ़ोतरी देखी जा रही है। कई आयोजकों के अनुसार, पहले जो पैकेज एक निश्चित बजट में उपलब्ध हो जाता था, अब उसके लिए परिवारों को काफी अतिरिक्त राशि जुटानी पड़ रही है।
इसका असर खासकर उन परिवारों पर है जिन्होंने पहले से अनुमानित खर्च के आधार पर तैयारी की थी। अब अचानक बढ़े रेट ने उनका पूरा बजट डगमगा दिया है। यही कारण है कि कुछ लोग मेहमानों की संख्या कम कर रहे हैं, कुछ लोग कार्यक्रम एक दिन में समेटने की योजना बना रहे हैं, जबकि कई परिवार अलग-अलग रस्मों को मिलाकर खर्च घटाने की कोशिश कर रहे हैं।
हल्दी, मेहंदी और संगीत जैसे कार्यक्रमों पर भी असर
शादी अब केवल एक दिन का कार्यक्रम नहीं रह गई है। हल्दी, मेहंदी, संगीत, कॉकटेल या पारिवारिक मिलन जैसे छोटे-बड़े आयोजन भी अब शादियों का हिस्सा बन चुके हैं। लेकिन गैस सिलेंडर की किल्लत और महंगाई ने इन अतिरिक्त कार्यक्रमों पर भी सीधा असर डाला है। पटना में कई परिवार अब इन आयोजनों को या तो सीमित कर रहे हैं या पूरी तरह प्रतीकात्मक रूप में करने की सोच रहे हैं।
कई घरों में मेहंदी और संगीत जैसे कार्यक्रमों के दौरान अब विस्तृत भोजन व्यवस्था की जगह हल्के स्नैक्स और सीमित मेन्यू रखा जा रहा है। कुछ आयोजनों में तो अलग फूड काउंटर लगाने के बजाय सीधे रेडीमेड नाश्ते परोसने की तैयारी हो रही है। इसका मतलब यह नहीं कि उत्साह कम हो गया है, बल्कि यह कि महंगाई ने खुशियों की शैली बदल दी है।
गैस सिलेंडर के लिए बढ़ी दौड़, पर स्पष्ट व्यवस्था का अभाव
शादी-विवाह के मौसम में बड़ी संख्या में परिवार और आयोजनकर्ता व्यावसायिक गैस सिलेंडर की व्यवस्था को लेकर वितरकों के चक्कर काट रहे हैं। कई जगहों पर लोग शादी कार्ड और आयोजन से जुड़े दस्तावेज लेकर गैस उपलब्ध कराने की गुहार लगा रहे हैं। लेकिन व्यावसायिक सिलेंडरों के आवंटन को लेकर स्पष्ट और पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण परेशानी बढ़ रही है। यही वजह है कि कैटरिंग और आयोजन से जुड़े लोग पहले से अधिक दबाव महसूस कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले कुछ सप्ताहों में शादी की तिथियां बढ़ने के साथ यह संकट और गहरा सकता है। पटना जैसे बड़े शहरी क्षेत्र में यदि प्रतिदिन बड़ी संख्या में विवाह समारोह होते हैं, तो स्वाभाविक है कि गैस सिलेंडरों की मांग अचानक कई गुना बढ़ जाएगी। इस बढ़ती मांग और सीमित उपलब्धता के बीच सबसे बड़ा नुकसान उपभोक्ता और आयोजक दोनों को झेलना पड़ रहा है।
शादी का कुल बजट एक से डेढ़ लाख तक बढ़ा
पटना के कई परिवारों का कहना है कि शादी का जो खर्च पहले एक तय सीमा में संभल जाता था, अब उसमें एक से डेढ़ लाख रुपये तक की अतिरिक्त बढ़ोतरी महसूस हो रही है। केवल खाने-पीने के खर्च में ही हजारों से लेकर कई दसियों हजार रुपये तक का अंतर आ गया है। इसके अलावा उपहार, श्रृंगार, सजावट, परिवहन और दूसरे जरूरी सामानों की कीमतों में भी इजाफा हुआ है।
यानी शादी का खर्च अब केवल कैटरिंग के कारण नहीं बढ़ा, बल्कि पूरे आयोजन की श्रृंखला महंगी हो गई है। परिवारों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वे परंपरा, सम्मान और बजट—तीनों को एक साथ कैसे संभालें। यही वजह है कि अब “शोभा” से ज्यादा “समझदारी” वाली शादी की चर्चा बढ़ रही है।
आगे और बढ़ सकती है परेशानी
अप्रैल से जुलाई तक का समय शादी-विवाह के लिहाज से बेहद व्यस्त माना जाता है। ऐसे में जैसे-जैसे मुहूर्त की तारीखें नजदीक आएंगी, गैस सिलेंडरों और कैटरिंग सेवाओं की मांग और बढ़ेगी। यदि आपूर्ति की स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में प्रति प्लेट दर और ऊपर जा सकती है। इसका असर केवल शहर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आसपास के इलाकों और छोटे आयोजनों पर भी दिखाई देगा।
पटना में फिलहाल जो तस्वीर उभर रही है, वह साफ संकेत देती है कि इस बार शादी सीजन “भव्यता” से ज्यादा “बजट मैनेजमेंट” का सीजन बनता जा रहा है। जिन परिवारों ने समय रहते तैयारी और बुकिंग कर ली है, वे भी बढ़ती लागत से बच नहीं पा रहे। वहीं जिनकी शादियां आने वाले हफ्तों में हैं, उनके लिए यह समय चिंता और समायोजन दोनों का बन गया है।
निष्कर्ष
पटना में एलपीजी सिलेंडर की किल्लत ने शादी-विवाह जैसे पारंपरिक और खुशहाल आयोजनों की रफ्तार पर असर डाल दिया है। प्रति थाली कीमत बढ़ना, मेन्यू छोटा होना, लाइव स्टॉल हटना और छोटे कार्यक्रमों में कटौती—ये सब अब केवल अपवाद नहीं, बल्कि एक नई हकीकत बनते जा रहे हैं। अगर हालात जल्द नहीं सुधरे, तो आने वाले शादी सीजन में महंगाई और गैस संकट का असर और गहरा दिख सकता है। फिलहाल परिवारों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है—खुशियों को कैसे बरकरार रखा जाए, जब खर्च लगातार हाथ से फिसलता जा रहा हो।
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